JNU: सिर्फ सबूत का दावा, 100 घंटे बाद भी हिंसा केस में किसी की गिरफ्तारी नहीं

जेएनयू में घुसकर छात्रों पर हमला करने वालों को पुलिस नहीं पकड़ पाई है. इससे छात्रों और वहां के टीचरों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. आज यानी गुरुवार को जेएनयू के छात्र और शिक्षकों का एक गुट मंडी हाउस से जंतर-मंतर तक मार्च करने वाला है.

तीन हफ्तों के अंदर दिल्ली की दो सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी जेएनयू और जामिया में जमकर बवाल और हिंसा की घटना हुईं. जामिया में बीते 15 दिसंबर को नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा देखने को मिली थी, जबकि जेएनयू में हॉस्टल फीस बढ़ोतरी के खिलाफ चले आ रहे लंबे आंदोलन ने रविवार को मारपीट और तोड़फोड़ का रूप ले लिया. दिलचस्प बात ये है कि जामिया में जहां पुलिस बिना यूनिवर्सिटी प्रशासन की इजाजत के कैंपस तक जा पहुंची थी और उस पर छात्रों से मारपीट के आरोप भी लगे, वहीं जेएनयू कैंपस के अंदर घंटों तांडव चलता रहा और पुलिस खड़ी देखती रही.

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में हॉस्टल फीस बढ़ोतरी के खिलाफ करीब दो महीने से ज्यादा वक्त से छात्रों का विरोध प्रदर्शन चल रहा था. रविवार को रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख थी. लेफ्ट संगठन और जेएनयू छात्रसंघ रजिस्ट्रेशन का विरोध कर रहे थे और फीस घटाने की मांग कर रहे थे. इसी कड़ी में वहां एबीवीपी से जुड़े छात्र नेता पहुंच गए और दोनों संगठनों के बीच तीखी नोक-झोंक हो गई.

रविवार शाम 4 बजे जेएनयू छात्रसंघ ने साबरमती हॉस्टल के पास एक सभा बुलाई. इसके बाद बाद 5 बजे छात्र गुटों में झड़प हो गई. इसके बाद कैंपस के अंदर नकाबपोश लोग दिखाई दिए, जिन्होंने लाठी-डंडों से हॉस्टल में तांडव मचाया और छात्रों व टीचरों से मारपीट की.

इन नकाबपोश हमलावरों का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में नजर आ रहा है कि नकाबपोश लोग हाथों में लाठी-डंडे और रॉड लिए जा रहे हैं. हैरानी की बात ये है कि जब ये नकाबपोश जा रहे हैं तो पुलिस के जवान वहीं खड़े हैं, लेकिन कोई उन्हें रोक नहीं रहा है.