क्यों- धर्म की वजह से आपस में लड़ रहे हैं ईरान और सऊदी अरब

क्या आप जानते हैं ईरान और सऊदी अरब इस्लामिक देश होने के बाद भी आपस में क्यों लड़ते हैं. जानें- क्या है वजह.

इस्लामिक देश ईरान और सऊदी अरब का आपसी टकराव काफी पुराना है. अब चिंता ये है कि कहीं दिन पर दिन बढ़ती ये तल्खी खाड़ी देशों के इलाके को वॉर जोन न बना दे. क्षेत्रीय प्रभुत्व को लेकर दो पड़ोसियों की लड़ाई खत्म होने का नाम नहीं ले रही. दोनों ही इस्लामिक देश हैं, लेकिन फिर भी इनमें आपसी रार है. इसकी वजहों की पड़ताल करेंगे तो पाएंगे कि इनके टकराव की वजह भी कहीं न कहीं धर्म से जुड़ी है. ये टकराव इस्लाम के शिया-सुन्नी पंथ को लेकर है. इन दोनों देशों की धार्मिकता में ईरान शियाओं का देश है तो सऊदी सुन्नी प्रभुत्व वाला है.

आसान भाषा में समझिए कि ईरान और सऊदी अरब में दुश्मनी क्यों है

आपको बता दें, सऊदी अरब और ईरान लंबे समय से एक दूसरे के विरोधी रहे हैं. दोनों के बीच पिछले कई सालों में हालात गंभीर हो गए हैं. सऊदी अरब और ईरान ये दोनों देश पड़ोसी और लंबे समय से क्षेत्रीय प्रभुत्व के लिए आपस में लड़ रहे हैं.

बता दें, उनके बीच का दशकों पुराना झगड़ा धार्मिक मतभेदों के कारण बढ़ा है, क्योंकि दोनों इस्लाम के अलग- अलग पंथ को मानते हैं. ये दो पंथ हैं- शिया और सुन्नी. ईरान बड़े पैमाने पर शिया मुस्लिम है, जबकि सऊदी अरब खुद को प्रमुख सुन्नी मुस्लिम शक्ति के रूप में देखता है. ऐसा नहीं है कि ये लड़ाई सिर्फ सऊदी अरब और ईरान में दिखती है, बल्कि ये टकराव ऐसे कई देशों में नजर आता है जिनमें शिया और सुन्नी हैं. ऐसे में कुछ देश ईरान को सपोर्ट करते हैं तो कुछ सऊदी अरब को.

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