यस बैंक की हालत को सुधारने के लिए आरबीआई ने संभाला मोर्चा

यस बैंक की हालत दिन पर दिन पतली होती जा रही है। शेयर बाजार में एक महीने के भीतर इसमें करीब 30 फीसद से उपर की गिरावट दर्ज हो गई है।

 

नई दिल्ली। यस बैंक की हालत दिन पर दिन पतली होती जा रही है। शेयर बाजार में एक महीने के भीतर इसमें करीब 30 फीसद से उपर की गिरावट दर्ज हो गई है। यस बैंक की खराब खस्ता हाल को देखते हुए आरबीआई ने मोर्चा संभाल लिया है। आरबीआई ने अब इस बैंक से निकासी की सीमा एक महीने के भीतर 50 हजार से नीचे कर दी है। हालांकि आरबीआई ने कहा है कि विशेष परिस्थितियों में यथा, शादी, बीमारी और शिक्षा के मामले में यह निकासी पांच लाख रूपये प्रति महीने की जा सकती है। आरबीआई ने कहा कि हम इस बैंक को ठीक करने का प्रयास कर रहे हैं। किसी भी खाता धारक को इससे परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस खबर के बाद अब यस बैंक के एटीएमों पर काफी भीड़ देखी जा रही है।

इसके अलावे आरबीआई ने इस बैंक की देखरेख के लिए एसबीआई के पूर्व सीएफओ प्रशांत कुमार को एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया है।

करीब 15 साल पहले शुरू हुए यस बैंक की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। बैंक पर कर्ज बढ़ता जा रहा है तो वहीं शेयर भी टूट रहा है। यस बैंक की बदहाली इतनी बढ़ गई है कि सिर्फ 15 महीने के भीतर बैंक के निवेशकों को 90 फीसदी से अधिक का नुकसान हो गया है।

अगस्‍त 2018 में यस बैंक का जो शेयर 400 रुपये से अधिक के भाव पर बिक रहा था वो आज लुढ़क कर 30 रुपये से भी नीचे आ गया है। वहीं सितंबर 2018 में यस बैंक का मार्केट कैप करीब 80 हजार करोड़ रुपये था, जो अब 9 हजार करोड़ के स्‍तर पर आ गया है। इस हिसाब से बैंक के मार्केट कैप में 70 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा की कमी आई है। बीते कुछ सालों में यस बैंक को एक के बाद एक झटके लगे हैं। इसमें सबसे बड़ा झटका आरबीआई की ओर से दिया गया। साल 2018 में आरबीआई को लगा कि यस बैंक अपने डूबे हुए कर्ज (एनपीए) और बैलेंसशीट में कुछ गड़बड़ी कर रहा है। इसके बाद आरबीआई ने यस बैंक के चेयरमैन राणा कपूर को पद से जबरन हटा दिया। बैंक के इतिहास में पहली बार था जब किसी चेयरमैन को इस तरह से पद से हटाया गया। इसके अलावा यस बैंक को क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) के मोर्चे पर भी झटका लगा। दरअसल, क्‍यूआईपी के जरिए बैंक का जो फंड जुटाने का लक्ष्‍य रखा था वो पूरा नहीं हो सका। इन हालातों में दुनिया भर की रेटिंग एजेंसियां बैंक को संदिग्‍ध नजर से देख रही हैं और निगेटिव मार्किंग कर रही हैं।

  

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राजेश राय, संपादक, जनसत्ता एक्सप्रेस

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