अर्नब गोस्वामी को लेकर सोशल मीडिया पर छीड़ी बहस, दो हिस्सों में बंटे


नई दिल्ली। रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। एक ग्रुप अर्नब के साथ खड़ा हो तो दूसरा ग्रुप मुंबई पुलिस की कार्रवाई को सही बता रहा है।

नई दिल्ली। रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। एक ग्रुप अर्नब के साथ खड़ा हो तो दूसरा ग्रुप मुंबई पुलिस की कार्रवाई को सही बता रहा है। अर्नब के कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर दिए गए बयान के संबंध में मुंबई पुलिस ने दस घंटे तक पूछताछ की। पूरे मामले पर एडिटर्स गिल्ड, प्रेस काउंसिल और ब्रॉडकास्टिंग एसोसिएशन ने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी है।

मुंबई पुलिस के पूछताछ करने के बाद बाहर आए अर्नब गोस्वामी ने कहा कि सोनिया गांधी पर मेरी टिप्पणी के संबंध में कई घंटे तक पूछताछ की गई। इसमें साफ कर दिया है कि मैं अपने बयान के साथ हूं। पुलिस को मैंने अपने पक्ष की कहानी बताई और वो इससे संतुष्ट हैं। मैंने जांच में सहयोग किया।

पत्रकारों के सवाल के जवाब में अर्नब ने कहा कि अभी इसके पीछे का मकसद नहीं बताना चाहता। लेकिन हर कोई देख रहा है कि मैं सच्चाई की तरफ हूं। वहीं पूरे मामले पर वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेशाई ने ट्वीट किया है। ट्वीट में कहा है कि क्या एक टीवी प्रोग्राम के सिलसिले में पूछताछ करने के लिए वाकई मुंबई पुलिस को 10 घंटे चाहिए?

वहीं सांसद राजीव चंद्रशेखर ने भी  ट्वीट किया है। लिखा है कि यकीन नहीं होता कि अर्नब गोस्वामी से 12 घंटे तक पूछताछ हुई।  क्योंकि उन्होंने सोनिया गांधी को उनके मूल नाम से संबोधित किया। बता दें कि महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत ने गोस्वामी के खिलाफ नागपुर में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें पालघर की घटना के संबंध में उनके टीवी शो में सोनिया गांधी पर दिए उनके बयानों का जिक्र था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब को राहत दी है। इस पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट किया। उन्होंने अर्नब के बहाने कश्मीर के पत्रकार और लेखक गौहर गिलानी का मामला भी उठाया। तर्क दिया गया कि अगर अदालतों का मकसद देश में अभिव्यक्ति की आजादी को बचाए रखना है तो पत्रकारों से जुड़े अलग-अलग मामलों में ही कानून का रुख अलग-अलग क्यों नजर आता है।

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राजेश राय, संपादक, जनसत्ता एक्सप्रेस

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