मनोज सिन्हा को राज्यसभा नहीं भेजना चाहती है भाजपा !

कभी पीएम नरेंद्र मोदी व अमित शाह की टीम के सक्रिय सदस्य रहे पूर्व रेल राज्य व संचार मंत्री मनोज सिन्हा की पार्टी में उपेक्षा का क्या कारण है। क्या कारण है कि भाजपा उन्हें राज्यसभा भी भेजने से

 

राजेश राय, नई दिल्ली

कभी पीएम नरेंद्र मोदी व अमित शाह की टीम के सक्रिय सदस्य रहे पूर्व रेल राज्य व संचार मंत्री मनोज सिन्हा की पार्टी में उपेक्षा का क्या कारण है। क्या कारण है कि भाजपा उन्हें राज्यसभा भी भेजने से गुरेज कर रही है। क्या विकास पुरुष को पार्टी ने पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है या फिर ऐसा क्या कारण है कि पार्टी उन्हें न संगठन में जगह दे रही है न ही सरकार में। जबकि पिछली सरकार में उन्हें रेल राज्य मंत्री बनाया गया। उऩकी काबिलियत को देखते हुए मोदी सरकार में उन्हें संचार मंत्रालय की अहम विभाग की जिम्मेदारी सौंपी। उनके कामों को न केवल पूरे देश में सराहा गया बल्कि उसकी हर जगह तारीफ हुई। हालांकि इसके बाद भी जातीय समीकरण के कारण 2019 का लोकसभा चुनाव वे गाजीपुर से अफजाल अंसारी से हार गए। पीएम नरेंद्र मोदी की वाराणसी संसदीय सीट से सटी गाजीपुर से जीत का परचम और विकास की रेल चलाने के बाद उनका नाम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए भी चला। पर सियासी समीकरण औऱ सियासत की विषवेल में वे वह पद नहीं पा सके।

 

 

अपनी ईमानदारी, ठोस प्लानिंग और बेबाकी के लिए जाने जाने वाले मनोज सिन्हा को गाजीपुर से लोकसभा चुनाव हारने के बाद पार्टी में वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। चुनाव हारने के बाद लोगों को लग रहा था कि उनकी काबिलियत को देखते हुए पीएम मोदी उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाते हुए सरकार का अहम हिस्सा बनाएंगे पर ऐसा नहीं हुआ। तो क्या मनोज सिन्हा को पार्टी ने वनवास दे दिया है, उन्हें पार्टी ने दरकिनार कर दिया है या फिर क्या कारण है कि उन्हें पार्टी में जगह नहीं मिल रही है या फिर आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले उनके सितारे बुलंद होंगे। उत्तर प्रदेश में भूमिहार बिरादरी में कम से कम उनके कद का कोई नेता नहीं है पर पार्टी में उनकी उपेक्षा से गाजीपुर के भाजपा कार्यकर्ता और भूमिहार बिरादरी के लोग खासे मायूस हैं। अब देखना होगा कि क्या पार्टी उनसे भी सियासी लाभ लेने की फिराक में है क्योंकि जैसे ही विधानसभा चुनाव की तैयारी होगी इन्हें पार्टी या तो राज्यसभा भेजेगी या फिर पूर्वांचल में जीत की कमान की जिम्मेदारी इन्हें सौंप दी जाएगी।

वैसे गाजीपुर में चर्चा है कि विकास पुरुष को पार्टी ने लगभग दरकिनार कर दिया है। क्योंकि पिछले एक साल में पार्टी ने कम से कम 20 लोगों को राज्यसभा का टिकट पकड़ाया पर मनोज सिन्हा उन लोगों में अपनी जगह नहीं बना पाएं। बीच बीच में चर्चा यह जरूर उड़ती रही कि पार्टी ने तो नहीं बल्कि नीतीश कुमार ने उन्हें राज्यसभा का टिकट देने का प्रस्ताव किया है। हालांकि उस चर्चा पर भी अब लगभग विराम लग गया है।

एक सूत्र ने बताया कि मनोज सिन्हा की पार्टी में कोई हैसियत कम नहीं हुई है। उनके काम के तरीके, लोगों से मिलने और गाजीपुर में सक्रियता में भी उनकी कोई कमी नहीं आई है। चूंकि गाजीपुर से पिछले साल ही वे चुनाव हारे हैं इसलिए पार्टी संभव है कि अक्टूबर में यूपी से खाली हो रही लगभग 10 सीटों में से एक सीट उनकी भी सुरक्षित होगी। यानी अक्टूबर में उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है।

 

  

 

 

 

 

 

 

 

 

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