दुनिया ने देखा अदभुत नजारा, रिंग वलय में दिखा सूर्यग्रहण

साल का पहला सूर्य ग्रहण लग चुका है। दोपहर साढ़े तीन बजे के करीब खत्म होने वाले इस ग्रहण का अद्भुत और अभूतपूर्व नजारा राजधानी समेत देश के कई हिस्सों और दुनिया में देखने को मिला। ज्योतिष में रविवार के दिन मृगशिरा तथा आर्द्रा नक्षत्र एवं मिथुन राशि में पड़ने वाले सूर्य ग्रहण को चूड़ामणि सूर्य ग्रहण कहते हैं। इस ग्रहण का सभी राशियों के लिए प्रभाव कैसा रहेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं। देश और दुनिया से सूर्य ग्रहण की तस्वीरें सामने आ रही हैं। 

भारत समेत कई देशों में रविवार को सूर्य ग्रहण देखा गया। सुबह 9.16 बजे ग्रहण शुरू हुआ।भारत में यह सबसे पहले सुबह 10.01 बजे मुंबई-पुणे में दिखा। दिल्ली, राजस्थान, जम्मू और गुजरात समेत देश के कई हिस्सों में ग्रहण देखा गया। पड़ोसी देशों पाकिस्तान और नेपाल में भी ग्रहण देखा गया। अन्य देशों में ग्रहण पूरी तरह 3.04 बजे खत्म हुआ। कई जगहों पर खंडग्रास (आंशिक) सूर्यग्रहण के रूप में दिखाई दिया।

ये साल का पहला और आखिरी सूर्य ग्रहण था। इसके बाद अगला सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर 2022 को भारत में दिखेगा। उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में चंद्रमा, सूर्य को 98.6% तक ढक देगा, जिससे ये कंगन जैसी आकृति का दिखाई देगा। ज्योतिष ग्रंथों में इसे कंकणाकृति सूर्य ग्रहण कहा गया है। 

 

विज्ञान के अनुसार, सूर्यग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब चंद्रमा घूमते-घूमते सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है तो सूर्य की चमकती रोशनी चंद्रमा के कारण दिखाई नहीं पड़ती। चंद्रमा के कारण सूर्य पूरी तरह या आंशिक रूप से ढंकने लगता है और इसी को सूर्यग्रहण कहा जाता है।


चाइनीज ग्रंथ शु-चिंग के अनुसार पहला सूर्य ग्रहण आज से करीब चार हजार साल पहले यानी 22 अक्टूबर 2134 ईसा पूर्व दिखा था। इस ग्रंथ के अनुसार आकाशीय ड्रैगन ने सूर्य को निगल लिया था। चाइनीज भाषा में ग्रहण शब्द को शी कहा जाता है, जिसका अर्थ है निगलना। चीन के ग्रामीण इलाकों में आज भी सूर्य ग्रहण के समय तेज आवाज में ड्रम बजाने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि इस तेज आवाज से सूर्य को निगलने वाला ड्रैगन डर के भाग जाता है। प्राचीन काम में चीन में सूर्य और चंद्र ग्रहण को दिव्य संकेत माना जाता था।

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राजेश राय, संपादक, जनसत्ता एक्सप्रेस