जब मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया, तब द्रविड़ मेरे आसपास मौजूद थे

भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने राहुल द्रविड़ की तारीफ करते हुए कहा कि उनमें गजब की काबिलियत है। वे नए खिलाड़ियों की मेंटल सिचुएशन को अच्छी तरह से समझते हैं और उसी के मुताबिक उनकी मदद भी करते हैं। पुजारा ने यह बात क्रिकेट वेबसाइट क्रिकेइंफो से कही।

भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने राहुल द्रविड़ की तारीफ करते हुए कहा कि उनमें गजब की काबिलियत है। वे नए खिलाड़ियों की मेंटल सिचुएशन को अच्छी तरह से समझते हैं और उसी के मुताबिक उनकी मदद भी करते हैं। पुजारा ने यह बात क्रिकेट वेबसाइट क्रिकेइंफो से कही।

पुजारा ने कहा, ‘‘मैं भाग्यशाली हूं, क्योंकि जब मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया, तब द्रविड़ मेरे आसपास मौजूद थे। वे इस स्तर पर पहुंच चुके थे कि मुझे बता सकते थे और उन्होंने मुझे बताया भी कि अपने आप से क्या उम्मीद करना चाहिए।’’

पुजारा ने कहा, ‘‘द्रविड़ ने मेरी मेंटल सिचुएशन को समझकर तब मदद की, जब मैं यंग था और शायद मैं तकनीक को लेकर सबकुछ नहीं जानता था। एक यंग क्रिकेटर के तौर पर मैं सारा ध्यान तकनीक पर ही फोकस करना चाहता था, तब उन्होंने मुझे इसकी जानकारी दी और बताया कि इसके साथ अन्य पहलू भी जरूरी हैं।”

उन्होंने कहा कि द्रविड़ से सीखा है कि क्रिकेट को अलविदा कहने का सही समय क्या होता है। पुजारा ने कहा,  ‘‘मैंने काउंटी क्रिकेट में उन्हें देखा कि पसर्नल और प्रोफेशनल जीवन को कैसे अलग रखते हैं। मैं उनकी सलाह को बहुत महत्व देता हूं। मुझे यह भी पता है कि क्रिकेट को कब अलविदा कहना है।’’


पुजारा ने कहा, ‘‘मैंने 8 साल की उम्र में पहली बार द्रविड़ को 2002 में बल्लेबाजी करते हुए देखा। उन्होंने एडिलेड में दोहरा शतक लगाया, जो उनकी पसंदीदा पारी रही। मैं 13 साल की उम्र में उनका फैन बन गया था। वे एक फाइटर थे। जब तक राहुल भाई क्रीज पर थे, तब तक विपक्षी टीम के लिए विकेट लेना मुश्किल था। वहीं, भारतीय टीम का स्कोर भी बढ़ता रहता था। टीम इंडिया को आउट करने के लिए विपक्षी को द्रविड़ को आउट करना जरूरी था, लेकिन वे डटे रहते थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उनकी तकनीक और स्वभाव को बारीकी से देखा और सीखा किया। जिस तरह से वे क्रिकेट पर बात करते हैं, उससे पता चलता है कि उन्हें बहुत ज्यादा ज्ञान है, लेकिन उन्होंने चीजों को कभी मुश्किल नहीं किया, बल्कि हमेशा अपने खेल को सरल ही रखा।’’

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राजेश राय, संपादक, जनसत्ता एक्सप्रेस