राजस्थान में कांग्रेस की सियासत भंवर में फंसी

राजस्थान संकट पर पायलट एवं उनके साथी नेताओं के खिलाफ कांग्रेस ने कड़ी कार्रवाई की। पायलट को उपमुख्यमंत्री पद के साथ-साथ पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया। इसके अलावा पायलट खेमे के सरकार के दो मंत्रियों विश्वेंद्र सिंह एवं रमेश मीणा को भी उनके पदों से तत्काल हटा दिया। यह फैसला कांग्रेस की विधायक दल की बैठक में लिया गया।

जयपुर। राजस्थान में कांग्रेस की सियासत भंवर में फंस गई है।  कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ बगावती रुख अपनाने वाले नेता सचिन पायलट ने राज्य में राजनीतिक घटनाक्रम पर पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए मंगलवार को कहा कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं।

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने ट्वीट किया, 'सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं।' इसके साथ ही उन्होंने अपने ट्विटर प्रोफाइल से उप मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का उल्लेख हटा दिया। अब उनके प्रोफाइल में उनके विधायक (टोंक) और पूर्व केंद्रीय मंत्री होने तथा कांग्रेस के वेबसाइट लिंक का उल्लेख है।

वहीं, कांग्रेस की कार्रवाई से पहले सचिन पायलट के करीबी एवं राज्य पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने भी मंगलवार सुबह शायराना अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने लिखा था कि 'मैं बोलता हूं, तो इल्ज़ाम है बग़ावत का, मैं चुप रहूं तो बड़ी बेबसी सी होती है।' इस ट्वीट को बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने रि-ट्वीट किया था।

सत्य को परेशान किया जा सकता है पराजित नहीं।

— Sachin Pilot (@SachinPilot) July 14, 2020

राजस्थान संकट पर पायलट एवं उनके साथी नेताओं के खिलाफ कांग्रेस ने कड़ी कार्रवाई की। पायलट को उपमुख्यमंत्री पद के साथ-साथ पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया। इसके अलावा पायलट खेमे के सरकार के दो मंत्रियों विश्वेंद्र सिंह एवं रमेश मीणा को भी उनके पदों से तत्काल हटा दिया। यह फैसला कांग्रेस की विधायक दल की बैठक में लिया गया।

गौरतलब है कि राजस्थान संकट पर कांग्रेस ने लगातार दूसरे दिन विधायक दल की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में सचिन पायलट और उनके खेमे के विधायक शामिल नहीं हुए थे।

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