क्रिकेट मे अश्वेतो की आवाज थे वीक्स

एक समय कैरेबियन क्रिकेट का पूरी दुनिया पर राज था। क्रिकेट के हर एक क्षेत्र बल्लेबाजी, गेदबाजी और क्षेत्ररक्षण मे उका कोई मुकाबला नही कर सकता था। कैरेबियन क्रिकेट के इस बादशाहत का आधार थ्री डबल्यू थे यानि वाल्काट,

मनीष कुमार जोशी
एक समय कैरेबियन क्रिकेट का पूरी दुनिया पर राज था। क्रिकेट के हर एक क्षेत्र बल्लेबाजी, गेदबाजी और क्षेत्ररक्षण मे उका कोई मुकाबला नही कर सकता था। कैरेबियन क्रिकेट के इस बादशाहत का आधार थ्री डबल्यू थे यानि वाल्काट, वारेल औय वीक्स। इनमे वीक्स सबसे प्रभावी थे। 1950 के दशक मे वन डे और टी 20 नही था परन्तु वीक्स उस जमाने मे तेज बल्लेबाजी के पर्याय थे। वेस्ट इंडियन क्रिकेट को नयी ऊंचाईयां प्रदान करने वाले वीक्स ने पिछले दिनो दुनिया को अलविदा कह दिया। जीवन के अंतिम सालो तक सक्रिय रहने वाले वीक्स कैरेबियन क्रिकेटरो के लिए एक मिसाल रहेगे।

 


वेस्ट इंडीज के थ्री डबल्यू ने 1950औय 1960 के दशक मे क्रिकेट की दुनिया मे तहलका मचा रखा था। इनमे सर एवर्ट वीक्स सबसे सफल बल्लेबाज थे। वे डान ब्रैडमेन के स्तर के बल्लेबाज थे। छोटे कद के थे परन्तु क्रीज पर कदमो का इस्तेमाल बखूबी करते थे। स्लोवर गेंदो पर कदमो के इस्तेमाल से वे गेंदो को सीमारेखा के बाहर पहुंचाते थे।  1948 मे उन्होने लगातार पांच पारियो मे पांच  शतक लगाने का अनोखा रिकार्ड बनाया। वे बेहतरीन बल्लेबाज होने के साथ ही एक कुशल क्षेत्ररक्षक भी थे। वे कवर और स्लीप के बेहतरीन क्षेत्ररक्षक थे। उन्होने क्षेत्ररक्षण पर एक मैन्यूअल तैयार किया जिसका नाम था आसपैक्टस आफ फिल्डि़गस। वे क्रिकेट से असीम प्रेम करते थे। वे हरहस्थिति मे खेलने के लिए तैयर थे। 1958 मे जांघ मे गंभीर चोट लगने पर उन्होने अंतराष्ट्रिय क्रिकेट को अलविदा कह दिया परन्तु घरेलू क्रिकेट 1964 तक खेलते रहे। उन्होने 12000 रन प्रथम श्रेणी क्रिकेट मे बनाये। इसके बाद वो चैरिटी के मैचो मे भी 42 साल की उम्र तक खेलते रहे।  वे बरबाडोस मे खेल अधिकारी भी रहे। 1979 के विश्व कप क्रिकेट मे कनाडा टीम के कोच रहे। 1994 मे उन्हे आई सी सी ने मैच रैफ्री भी बनाया। 2007 तक भी वे सक्रिय रहे उन्होने अपने कैरियर पर एक किताब भी लिखी।

 


वीक्स का जन्म एक गरीब परिवार मे हुआ। उसका घर लकड़ी का बना हुआ था परंतु उसमें क्रिकेट की प्रतिभा थी उसके स्थान निकल अपने उसे खिलाने उसे खिलाने अपने उसे खिलाने उसे खिलाने निकल अपने उसे खिलाने उसे खिलाने अपने उसे खिलाने उसे खिलाने से मना कर दिया क्योंकि वहां केवल गोरे रंग वाले खिलाड़ियों को प्रवेश मिलता था उस दिन उसने ठान लिया की वह 1 दिन वेस्टइंडीज के लिए खेलेगा और अपनी प्रतिभा के बल पर एक दिन वह महान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बना। रिटायरमेंट के बाद भी उन्होंने अश्वेत के लिए आवाज उठाइ। वेटरन मैच खेलने के लिए एक बार वे गये जहां श्वेत और अश्वेत के लिए भिन्न व्यवस्था थी उन्होने वहां खेलने से इनकार कर दिया। आयोजको द्वारा माफी मांगने पर वो खेले। वे रेड़ियो और क्रिकेट कोमेण्टेटर भी रहे।

 


वेस्ट इंडीज के युवा खिलाड़ी उनसे काफी कुछ सीख सकते है। उनका कैरियर आज भी प्रेरणा देने के लिए पर्याप्त है। वे वेस्ट इंडीज क्रिकेट के स्वर्णिम काल की नींव की धरोहर है।

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