हमारे बारे में

जनसत्ता एक्सप्रेस के माध्यम से हम एक ऐसी यात्रा कर रहे हैं, जिसमें आप भी सहयात्री व सहभागी हैं. यह यात्रा वर्ष 2002 में शुरू हुई थी, लेकिन कुछ व्यावधान आया और इसे एक पड़ाव पर विश्राम दिया गया. अब पुनः यह यात्रा वर्तमान दौर के संघर्ष जनित तनाव और अवसाद वाले माहौल में, इससे निजात के उपाय तलाशने की है. पाठको से रोजाना का रिश्ता कायम हो इसके लिए हम वेबपोर्टल के रूप में आये हैं. जिससे हमारा आपका संग-साथ बराबर बना रहे. पत्रकारिता केवल खबरों को पहुंचाना भर नहीं है, बल्कि उसके मूल्यों, मान्यताओं, उद्देश्यों, जनसरोकारों को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक विनम्र प्रयास है. हिंदी समाचार की वेबपोर्टलो की संख्या हजारों में है, इनमें से कई बहुत आकर्षक, लकदक, शानदार और हाईटेक हैं. तकरीबन सभी वेबपोर्टल अपने को उत्कृष्ट घोषित करते हैं, हम इस दौड़ में शामिल नहीं हैं लेकिन हम अलग और अनूठे हैं. यह मेरा नहीं हमारा वेबपोर्टल है- वर्तमान दौर की पड़ताल करने वाला. कॉरपोरेटी पत्रकारिता के इस माहौल में, जहां सभी अपने को अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय से कम नहीं होने का दावा करते न अघाते हों, भले ही उनका विस्तार किसी छोटे से सीमित भाषाई क्षेत्र तक ही सीमित क्यों न हो; उस दौर में समूची विनम्रता से स्वयं को लीक से हटकर कहना कुछ अटपटा सा लग सकता है. यदि ऐसा हो भी तो हमें अपने उद्देश्य और अपने पाठकों के प्यार के लिये यह भी स्वीकार है. इस स्वीकार की वजह है, सामाजिक सरोकार से संबद्ध सकारात्मक पत्रकारिता का वह उद्देश्यपूर्ण अभियान जिसका प्रारंभ इस पोर्टल के साथ हुआ है. यह आपके लिए ऊर्जा, स्फूर्ति, समाचार, विश्लेषण, साहित्य- कला संस्कृति, पर्यटन पूरे पैकेज के साथ आपका प्रतिनिधित्व करता है, और आप इसके प्रतिनिधि हैं.‘तह से तहकीकात तक, मुद्दे की बात, मुद्दत के बाद’ का सद्वाक्य इस अवधारणात्मक पोर्टल के लिये महज एक जुमला नहीं हैं. हम अपनी संपूर्ण पत्रकारीय प्रतिबद्धता के साथ इसके लिये प्रयासरत हैं कि वैश्विकस्तर की पत्रकारीय सोच, समझ, तकनीक, वर्तमान के प्रेरक प्रसंग, नित बड़ी होती में प्रगति और संभावनाओं के द्वार को पाठकों के स्तर पर प्रयुक्त कर सकें. इन मुद्दों को पत्रकारिता में प्रमुखता से स्थान मिल सके. पत्रकारिता महज चंद महानगरों और सत्ता के गलियारों में ही घूमती न रहे, केवल राजनीति और समस्याओं तक ही केंद्रित न हो, बल्कि इसमें समाधान और सकारात्मकता भी हो, जो उम्मीद जगाए. मुख्यधारा की पत्रकारिता में इन मुद्दों-मसलों पर भी गंभीर सम्यक विमर्श हो और अपनी प्रतिभाओं से भी देश-दुनिया परिचित हो. यह देखा गया है कि कथित मुख्यधारा की पत्रकारिता को हमारे क्षेत्र, गांव या अंचल की याद तभी आती है जब प्राकृतिक आपदा या सूखा, बाढ, भूकंप, की त्रासदी विद्रूप रूप ले ले, व्यापक स्तर पर महामारी, बीमारी, पलायन हो. बड़े पैमाने पर किसान आत्महत्या करते हों, हिंसा की कोई घटना अथवा दुर्घटना हो जाये, या फिर गरीबी और अशिक्षा जैसे कुछ दूसरे नकारात्मक उदाहरण सामने लाने हों. ऐसा कम ही होता है कि सकारात्मक उपलब्धियों को इनमें प्रमुखता मिली हो. हमारी कोशिश है कि सकारात्मक मुद्दे पत्रकारिता की मुख्यधारा में स्थापित हो. हमारा प्रयास है कि पत्रकारिता सामाजिक सरोकार से जुड़े और आम जनता के जीवन-स्तर में बेहतरी लाने का उपक्रम बने. उसका मकसद मात्र मुनाफा कमाना और कारोबार जगत का ख्याल रखना भर न हो. समाज को उचित दिशा मिले साथ ही तार्किक और सकारात्मक सोच वाले समाज का निर्माण हो. यह हमारा परम उद्देश्य है.विश्वास है हमारे सुधी पाठक हर कदम पर हमारे साथ होंगे!

हमारी टीम

धीरेंद्रनाथ श्रीवास्तव
प्रधान संपादक

राजेश राय
संपादक